Saturday, October 17, 2026

तलाश...यूँ ही नहीं

धड़कनों का शोर जब,
पीर में यौवन तलाशे ।
किस डगर पर पाँव धरना,
हो भ्रमित मनवा‌ तलाशे ।।

जब अधिक विश्रांतियों में,
नींद को रातें तलाशें ।
संतृप्त करती वेदना की,
प्यास को पानी तलाशे ।।

हो विवश संभावनाओं में
,
भीड़ जब सन्नाटा तलाशे ।
लफ्ज़ स्वर को कंठ देने,
चक्षुओं का द्रव तलाशें ।।

डगमगाती कश्तियाँ जब,
थाह सागर की तलाशें ।
तब विषमता के भँवर में,
घाव को खंजर तलाशे ।।

रचनाकार - निखिल वर्मा 
कार्यरत - भारत मौसम विज्ञान विभाग,
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार।
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