धड़कनों का शोर जब,
जब अधिक विश्रांतियों में,
नींद को रातें तलाशें ।
संतृप्त करती वेदना की,
प्यास को पानी तलाशे ।।
हो विवश संभावनाओं में,
डगमगाती कश्तियाँ जब,
थाह सागर की तलाशें ।
तब विषमता के भँवर में,
घाव को खंजर तलाशे ।।
रचनाकार - निखिल वर्मा
कार्यरत - भारत मौसम विज्ञान विभाग,
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार।
Copyright ©️ 2026.
पीर में यौवन तलाशे ।
किस डगर पर पाँव धरना,
हो भ्रमित मनवा तलाशे ।।
किस डगर पर पाँव धरना,
हो भ्रमित मनवा तलाशे ।।
जब अधिक विश्रांतियों में,
नींद को रातें तलाशें ।
संतृप्त करती वेदना की,
प्यास को पानी तलाशे ।।
हो विवश संभावनाओं में,
भीड़ जब सन्नाटा तलाशे ।
लफ्ज़ स्वर को कंठ देने,
चक्षुओं का द्रव तलाशें ।।
लफ्ज़ स्वर को कंठ देने,
चक्षुओं का द्रव तलाशें ।।
डगमगाती कश्तियाँ जब,
थाह सागर की तलाशें ।
तब विषमता के भँवर में,
घाव को खंजर तलाशे ।।
रचनाकार - निखिल वर्मा
कार्यरत - भारत मौसम विज्ञान विभाग,
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार।
Copyright ©️ 2026.